Ras kitne Prakar Ke Hote Hain

अगर दोस्तों आप Ras kitne Prakar Ke Hote Hain की तलाश में हैं तो आप सबसे अच्छे पृष्ठ में आए हैं। आज हम आपके लिए Ras kitne Prakar Ke Hote Hain लेकर आए हैं । इस पोस्ट के माध्यम से रस कितने प्रकार के होते हैं Ras Ke Prakar,Ras Ke kitne Ang Hote Hain जानेंगे तो पढ़िए नीचे लेख सारी जानकारी मिलेंगे ।

गद्य या पद्य पढ़ने से जो हम सबको अनुभूति होती है मतलब जिस भाव की अनुभूति ह्रदय में होती है, उसी आनंद को रस कहा जाता है | रस का उल्लेख सर्वप्रथम भरत मुनि ने अपने ग्रन्थ नाट्य शास्त्र में किया था।

रस के कितने अंग होते है? || Ras Ke kitne Ang Hote Hain

हिंदी व्याकरण में जो रस की परिभाषा दी गयी है उसके हिसाब से Ras Ke Ang को चार अंग में विभाज्य किया गया है। जिसके बारे में निचे लेख मेे बताया गया है:-

  1. विभाव
  2. संचारी भाव
  3. अनुभाव
  4. स्थायीभाव

रस कितने प्रकार के होते हैं || Ras kitne Prakar Ke Hote Hain

आपकी जानकारी के लिए बता से रस नौ प्रकार के होतें हैं। लेकिन कुछ विद्वानों के अनुसार ग्यारह रस होते हैं। हमने आपको इस लेख में नौ प्रकार के बारे जो निम्न प्रकार नीचे विस्तार से दिया गया है।

1.श्रृंगार रस :-

जब किसी काव्य छंद पद को पढ़ने से स्थाई भाव रति की व्यंजना होती है ,तो उसे श्रंगार रस कहते हैं। श्रृंगार रस का स्थाई भाव रति है।

उदाहरण –

“मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा न कोई जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई”
श्रृंगार रस के दो प्रकार :-

  1. संयोग श्रृंगार
  2. वियोग श्रृंगार

2.हास्य रस

हास्य रस का स्थायी भाव हास है। किसी वस्तु या विशेष यदि को देखकर हृदय मेे जो भाव उत्पन्न होता होता है। उसे हास्य रस कहा जाता है।स जब विभाव, अनुभाव तथा संचारी भावों से पुष्ट हो जाता है तो उसे ‘हास्य रस’ कहते है।

केसवदास ने चार प्रकार के हास्य का उलेख किया है।

  1. मन्द हास्य
  2. कलहास
  3. अतिहास
  4. परिहास

उदहारण :- लखन कहा हसि हमरे जाना। सुनहु देव सब धनुष सनाना

का छति लाभु जून धनु तोरे। रेखा राम नयन के शोरे। ।

3.करुण रस

जब हम किसी साहित्यिक काव्य ,गद्य आदि को पढ़ने के बाद मन में भाव या दया का भाव अपने हृदय में पैदा होता है हो तो करुण रस कहते है।

करुण रस का उदाहरण :
हाय राम कैसे झेलें हम अपनी लज्जा अपना शोक
गया हमारे ही हाथों से अपना राष्ट्र पिता परलोक।।

4.रौद्र रस

जब किसी काव्य मेे किसी व्यक्ति का क्रोध का वर्णन होता है । अथवा अपने गुरुजन आदि कि निन्दा से जो क्रोध उत्पन्न होता है तो उसे रौद्र रस कहते है।

उदहारण:-
मुख लाल हो जाना, दाँत पिसना, शास्त्र चलाना, भौहे चढ़ाना आदि के भाव उत्पन्न होते हैं।

5.वीर रस

सुप्रसिद्ध कवियों ने जिन कविताओं की रचना की वे आज भी पाठकों को उतनी ही ओज पूर्ण महसूस होती हैं और जोश और उत्साह का संचार मन में लाती हैं । वीर रस कहते हैं।

उदहारण :-
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी ।।

6.भयानक रस

जब कोई कविता पढ़कर मन में भय उत्पन हो या कविता मेे किसी के कार्य से किसी का भयभीत होने का वर्णन हो तो वह भयानक रस कहते है।

उदहारण :– अखिल यौवन के रंग उभार, हड्डियों के हिलाते कंकाल
कचो के चिकने काले, व्याल, केंचुली, काँस, सिबार

7.वीभत्स रस

जब भी किसी काव्य को पढ़कर मन में घृणा आये तो वीभत्स रस होता है।जिस काव्य रचना में घृणात्तम वस्तु या घटनाओं का उल्लेख हो वहां पर वीभत्स रस होता हैं।

उदहारण :- गिद्ध जाँघ कह खोदि-खोदि के मांस उचारत
स्वान आँगुरिन काटि-काटि के खान बिचारत।।

8.अद्भुत रस

जब किसी कविता या काव्य को पढ़कर एवं सुनकर मैं में को आश्चर्य होता है उसे अद्भुत रस होता है।

उदहारण :-
देखरावा मातहि निज अदभुत रूप अखण्ड
रोम रोम प्रति लगे कोटि-कोटि ब्रह्माण्ड

9.शांत रस

जब किसी काव्यों या कविता को पढ़कर मन में असीम शान्ति उत्पन्न होती है। एवं दुनिया से मोह खत्म होने का भाव उत्पन्न हो तो शांत रस कहते हैं।

उदहारण :-
जब मै था तब हरि नाहिं अब हरि है मै नाहिं
सब अँधियारा मिट गया जब दीपक देख्या माहिं।।

10.वात्सल्य रस

11.भक्ति रस

निष्कर्ष (Conclusion)

उम्मीद करते है दोस्तो आपको Ras kitne Prakar Ke Hote Hain है और रस से जुड़ी सारी जानकारी मिल गई होंगी। और आपके रस के बारे जितने प्रश्न थे सब मिल गए होंगे।

रस के बारे में पूछे जाने वाले सवाल F&Q

  1. रस के कितने अंग होते हैं?

    उत्तर – चार (4)

  2. रसों की संख्या कितनी होती है?

    उत्तर – ग्यारह (11)

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